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संस्कृतम्

मित्राणि,

इयं संस्कृतगङ्गा पुरा कदाचित् इह भारते अजस्रं प्रवहन्ती पुनरपि लोकहिताय देवलोकात् अवतारणीया इति धिया एव अयं प्रयासः।

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सादर

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